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मिथिला में उद्योग की वापसी की आहट: नीतीश कुमार के निर्देश पर सकरी-रैयाम चीनी मिलों को फिर से चालू करने की तेज तैयारी

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दरभंगा/मधुबनी: मिथिला क्षेत्र में औद्योगिक पुनर्जीवन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बिहार सरकार ने वर्षों से बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर गन्ना उद्योग विभाग ने दोनों मिलों के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है, जिसे राज्य की “समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार” नीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि बंद मिलों के पुनरुद्धार से न केवल औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी बल्कि किसानों और स्थानीय रोजगार को भी नई ताकत मिलेगी।
सूत्रों के अनुसार मिलों को नियमित गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दरभंगा और मधुबनी जिलों के कुल 2401 गांवों को आरक्षित घोषित किया गया है। इसमें सकरी मिल के लिए मधुबनी के 686 और दरभंगा के 697 गांवों को जोड़ा गया है, जबकि रैयाम मिल के लिए मधुबनी के 438 और दरभंगा के 580 गांवों को गन्ना आपूर्ति क्षेत्र में शामिल किया गया है। अंधराठाढ़ी, बबुरही, झंझारपुर, फुलपरास, राजनगर, बहादुरपुर, हायाघाट, जाले और सिंघवाड़ा जैसे प्रखंड इस योजना के केंद्र में रहेंगे, जहां से गन्ना उत्पादन का बड़ा आधार तैयार होगा।
राज्य सरकार ने सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत बंद उद्योगों को पुनर्जीवित करने की नीति को प्राथमिकता दी है। इसी क्रम में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो वित्तीय ढांचे, संचालन व्यवस्था और उत्पादन लक्ष्य की नियमित समीक्षा करेगी। बताया जा रहा है कि दोनों चीनी मिलों का संचालन सहकारिता मॉडल के तहत किया जाएगा, जिससे किसानों की भागीदारी और जवाबदेही मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन मिलों के चालू होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बहुआयामी लाभ मिलेगा। गन्ना किसानों को बाजार और भुगतान की गारंटी मिलने के साथ परिवहन, भंडारण, श्रम और सहायक उद्योगों में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। लंबे समय से ठप पड़ी इन मिलों की चिमनियों से फिर धुआं उठना केवल उत्पादन की वापसी नहीं बल्कि मिथिला में औद्योगिक गतिविधियों के नए दौर की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सरकारी तैयारियां कितनी जल्दी जमीनी हकीकत में बदलती हैं। यदि योजना तय समय पर लागू हुई तो क्षेत्र में उद्योग और खेती दोनों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।

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